अहिच्छत्र भी था बरेली का पुराना नाम ब्रिटिशकाल में टीलों की खुदाई से निकला था चमत्कृत करने वाला अहिच्छत्र का इतिहास Bareilly News
Ravi Patel अहिच्छत्र...आज का बरेली , जहां सदियों पहले उल्लास, उमंग, ऐश्वर्य और वैभव के हजारों रंग बिखरे थे। जहां धन-संपदा की चमक से यह नगर अन्य समकालीन राज्यों को अपनी ओर आकर्षित करता था। जिसके गौरवशाली अतीत का अनुमान आज भी यहां अवस्थित खंडहरों को देखकर लगाया जा सकता है। बरेली के आंवला स्टेशन से कोई 10 किमी उत्तर में प्राचीन अहिच्छत्र के अवशेष आज भी मौजूद हैं। ब्रिटिशकाल में इन टीलों की खोदाई के बाद चमत्कृत कर देने वाला इतिहास सामने आया। आइए जानते है अहिच्छत्र के उस इतिहास को जिसे रुहेलखंड की धरती अपने में संजोए हुए है। रुहेलखंड नाम से प्रसिद्धि प्राप्त करने से पहले बरेली समेत आसपास का बड़ा परिक्षेत्र प्राचीनकाल में पांचाल राज्य हुआ करता था। महाभारतकाल में अहिच्छत्र पांचाल नामक राज्य की राजधानी रहा। द्रोपदी इसी राज्य की राजकुमारी थीं, जिन्होंने 5000 साल पहले भगवान शिव को समर्पित बनखंडी नाथ मंदिर में पूजा की थी, पांचाल जनपद का प्रामाणिक इतिहास ई.पू. छठी शताब्दी से मिलता है। तब यह 16 जनपदों में से एक था। चीनी यात्री ह्वेनसांग और उसके बाद 11वीं सदी में आए अल बरूनी ने भी अहिच्छत्र का ...