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नीलकमल' कोठी: जहां हरिवंश राय और तेजी बच्चन का प्रेम शुरू हुआ यहीं बीता बिग बी का बचपन

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Ravi Gangwar  बाबू रामजी शरण सक्सेना की 'नीलकमल' कोठी बरेली का एक ऐतिहासिक साहित्यिक और सांस्कृतिक केंद्र थी। यहीं हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन का प्रेम परवान चढ़ा, और अमिताभ बच्चन ने अपने बचपन के कुछ यादगार पल बिताए। याद जब आती है उनकी ऐ सरन, जाता हूं बेखबर दुनिया से... शहर के प्रख्यात साहित्यकार बाबू रामजी शरण सक्सेना की ये पंक्तियां प्रेम के अलग-अलग रूप को दर्शाती है। उनका जन्म 20 मई 1907 को बदायूं में हुआ, 1930 के दशक में उन्होंने बरेली को अपनी कर्मभूमि बनाया। महान कवि डा. हरिवंश राय बच्चन उनके घनिष्ठ मित्रों में शामिल रहे। बच्चन और उनकी जीवनसंगिनी तेजी बच्चन का प्रेम बाबूजी के साहित्यिक परिवेश में परवान चढ़ा। उनकी पंचभुजाकार कोठी 'नीलकमल' केवल एक भवन नहीं, बल्कि साहित्यिक और सांस्कृतिक स्मृतियों का जीवंत केंद्र थी। इसी परिसर में महानायक अमिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ बच्चन ने अपने बचपन के कुछ यादगार पल भी बिताए। बरेली जंक्शन मार्ग पर स्थित 'रामजी शरण सक्सेना एडवोकेट मार्ग' उनकी न्यायप्रियता, साहित्यिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं की अमिट याद दिलाता है। साहि...

हरिवंशराय बच्चन के पत्र से खुला बच्चन परिवार का बड़ा राज, बीएससी के बाद पढ़ना नहीं चाहते थे हमारे अमिताभ बच्चन

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Ravi Gangwar  बालीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का कद फिल्म इंडस्ट्री में जितना बड़ा है, उससे कम उनका संघर्ष भी नहीं है।अमिताभ बच्चन ने यह मुकाम हासिल करने में अथक प्रयास किये। अमिताभ बच्चन ने बीएससी करने के बाद आगे पढ़ाई करने से इन्कार कर दिया था।वह नौकरी करके अपने करियर को संवारना चाहते थे। प्रसिद्ध कवि हरिवंशराय बच्चन ने बरेली के बाल साहित्यकार निरंकार देव सेवक को लिखे पत्र में इसका जिक्र किया था।हरिवंश राय खुद भी बरेली में बसने की इच्छा रखते थे!!!!! हरिवंशराय बच्चन ने 24 अप्रैल 1963 को निरंकार देव सेवक को भेजे पत्र में यह उल्लेख किया था।वह लिखते हैं कि भाई निरंकार, मेरा कार्ड मिल गया होगा। तुम्हें जमीन मिल गई है तो जरूर ले लो। मेरे पास न तो जमीन खरीदने को रुपया है न मकान बनाने को।मकान भी बना लो।एक छोटा काटेज ऐसा भी सोचकर बना लो कि यह बच्चन के लिए है।शायद रिटायर होकर तुम्हारे पास ही आ जाऊं। हमारी अवधी में एक गीत गाते हैं, ' ना जानै राम कहां लागै माटी', पता क्या बरेली की ही माटी बदी हो।पिछले नवंबर में मुझे रिटायर होना था पर अब तीन बरस की अवधि और बढ़ गई है।अमित यानी कि अमिताभ बच...