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कुर्मी राजा जयलाल सिंह और बेगम हजरत महल की जोड़ी 1857 की क्रांति के महानायक,,,,महाराजा तुलसी कुर्मी

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Ravi Patel 1857 की प्रथम स्वाधीनता क्रांति में बेगम हज़रत महल और राजा जय लाल सिंह (Raja Jai Lal Singh) की जोड़ी ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अवध (लखनऊ) में विद्रोह का सबसे मजबूत मोर्चा संभाला था. राजा जय लाल सिंह, बेगम हज़रत महल की सेना के मुख्य सेनापति (Commander-in-Chief) और उनके सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार थे. इन दोनों महानायकों का ऐतिहासिक संबंध और 1857 की क्रांति में इनका योगदान इस प्रकार है: 👑 सेनापति की नियुक्ति और "नुसरत जंग" की उपाधि भरोसेमंद नेतृत्व: जब अंग्रेजों ने नवाब वाजिद अली शाह को बंदी बनाकर कलकत्ता भेज दिया, तब बेगम हज़रत महल ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने 11 वर्षीय नाबालिग पुत्र बिरजिस क़द्र की ताजपोशी कर अवध की कमान संभाली. [1, 4, 5] ताजपोशी और जिम्मेदारी: ब्रिटिशों के खिलाफ सैन्य मोर्चे को मजबूत करने के लिए बेगम ने आजमगढ़ के अवधिया-कुर्मी राजवंश से ताल्लुक रखने वाले वीर योद्धा राजा जय लाल सिंह को अपना मुख्य सेनापति नियुक्त किया. ताजपोशी की पूरी रस्म भी उन्हीं की देखरेख में संपन्न हुई थी. [2, 5, 6, 7] शाही उपाधि: राजा जय लाल की वीरता और प्रशासनिक सूझब...