कुछ इतिहास जो दर्शाते है कि सनातन धर्म सबसे पुराना है

Ravi Patel

दुनिया के सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद 



कालक्रम (Timeline) में अंतर: वैश्विक विद्वानों के अनुसार, ऋग्वेद की लिखित रचना का प्रारंभिक काल लगभग 4000 ईसा पूर्व (BCE) से 3500 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है (कुछ भारतीय विद्वान इसे इससे भी कहीं अधिक पुराना मानते हैं)। इसके विपरीत, अवेस्ता के सबसे प्राचीन भाग यानी 'गाथा' (Gathas) की रचना लगभग 800 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व के आसपास मानी जाती है। 


भाषा की प्राचीनता (Archaic Language): ऋग्वेद की 'वैदिक संस्कृत' भाषा, अवेस्ता की 'अवेस्तन' भाषा की तुलना में अधिक प्राचीन और अपने मूल रूप के करीब है। भाषा विज्ञान का नियम है कि समय के साथ शब्दों के उच्चारण बदलते हैं। उदाहरण के लिए, वैदिक संस्कृत का प्राचीन 'स' ध्वनि अवेस्तन भाषा में बदलकर 'ह' हो गई (जैसे: सप्त सिंधु बन गया हप्त हिंदू, और असुर बन गया अहुर)। इससे प्रमाणित होता है कि ऋग्वेद पहले अस्तित्व में आया।

सांस्कृतिक विकास का क्रम: ऋग्वेद में जिन प्राकृतिक देवताओं (जैसे इंद्र, मित्र, वरुण, अग्नि) की स्तुति की गई है, वे बहुत प्राचीन रूप में हैं। अवेस्ता के समय तक आते-आते धार्मिक विचारों में बदलाव आ चुका था। वहां केवल 'अहुर मज्दा' को सर्वोच्च माना गया और ऋग्वेद के कुछ देवताओं (जैसे इंद्र और दैव) को नकारात्मक रूप में दर्शाया गया, जो धार्मिक सुधार या विभाजन के बाद के चरण को दिखाता है।

साझा विरासत: दोनों ग्रंथों में 'सोम' (ऋग्वेद) और 'हओम' (अवेस्ता) नामक पवित्र पेय और यज्ञ/अग्नि पूजा की परंपराएं साझा हैं। इससे स्पष्ट है कि दोनों सभ्यताएं कभी एक ही मूल से जुड़ी थीं, जिसमें ऋग्वेद उस मूल परंपरा का सबसे पहला लिखित दस्तावेज है।
कुरान""""x
कुरान की आयतें 1400 साल पहले (610 ईस्वी से) लिखी जानी शुरू हुई थीं, और इसे पूरी तरह से एक आधिकारिक किताब का रूप पैगंबर साहब की मृत्यु के लगभग 20 साल बाद (650-653 ईस्वी में) मिला।

भगवान राम और रामायण



वानर सेना का पश्चिम दिशा में अभियान: रामायण के 'किष्किंधा कांड' में जब सुग्रीव माता सीता की खोज के लिए वानर सेना को पश्चिम दिशा की ओर भेजते हैं, तो वे सिंधु नदी के समुद्र में गिरने के स्थान (आज का कराची) से आगे के भूगोल का वर्णन करते हैं। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि इस वर्णन में जिन पर्वतों का जिक्र है, वे ईरान की ज़ाग्रोस पर्वतमाला (Zagros Mountains) की ओर संकेत करते हैं。
इराक-ईरान सीमा पर प्राचीन नक्काशी: इराक के सुलेमानिया (Sulaymaniyah) प्रांत में (जो ईरान सीमा के बेहद करीब है), एक पहाड़ी पर 6000 साल पुरानी एक नक्काशी (Rock Relief) मिली है। पुरातत्वविदों और शोधकर्ताओं के अनुसार, इस नक्काशी में एक धनुषधारी राजा और उनके पैरों के पास बैठे एक अनुचर की आकृति है, जिसे कई विद्वान प्रभु राम और हनुमान जी के प्राचीन साक्ष्य के रूप में देखते हैं।
रामायण और शाहनामे में समानता: ईरान के राष्ट्रीय महाकाव्य 'शाहनामे' (Shahnameh) (जिसे फिरदौसी ने लिखा था) और रामायण की कहानियों में बहुत समानताएं हैं। उदाहरण के लिए, शाहनामे के नायक 'सियावश' और भगवान राम दोनों की कहानी में सौतेली मां की साजिश, देश निकाला (वनवास) और पवित्रता सिद्ध करने के लिए अग्नि परीक्षा से गुजरने जैसे प्रसंग बिल्कुल एक जैसे हैं।
फ़ारसी रामायण का क्रेज: मध्यकाल में मुगल बादशाहों के समय वाल्मीकि रामायण का फ़ारसी भाषा (Persian) में अनुवाद किया गया था। ईरान के सांस्कृतिक केंद्रों और वहां की ऐतिहासिक लाइब्रेरी (जैसे रज़ा लाइब्रेरी) में सोने के पानी से लिखी गई 'फ़ारसी रामायण' की प्राचीन प्रतियां आज भी बेहद सुरक्षित और लोकप्रिय हैं।
सनातन धर्म (जिसे हिंदू धर्म भी कहा जाता है) दुनिया का सबसे प्राचीन और जीवित धर्म है। इसका कोई एक अकेला संस्थापक, पैगंबर या शुरुआत की निश्चित तारीख नहीं है।
इसकी प्राचीनता को समझने के लिए इसे दो दृष्टिकोणों से देखा जाता है—धार्मिक और वैज्ञानिक/ऐतिहासिक:
1. धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण अनादि और अनंत: 'सनातन' शब्द का शाब्दिक अर्थ ही होता है—"जो हमेशा से था, हमेशा है और हमेशा रहेगा।" शास्त्रानुसार इस धर्म का न तो कोई आदि (शुरुआत) है और न ही कोई अंत.अपौरुषेय वेद: इस धर्म के मूल स्तंभ 'वेद' माने जाते हैं. धार्मिक मान्यता है कि वेद 'अपौरुषेय' हैं, यानी इन्हें किसी मनुष्य ने नहीं लिखा, बल्कि सृष्टि के आरंभ में ऋषियों ने ईश्वर से सीधे दिव्य ज्ञान (श्रुति) के रूप में प्राप्त किया था.कालगणना: हिंदू ग्रंथों (जैसे पुराणों) की चक्रीय कालगणना (युग चक्र—सत्ययुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग) के अनुसार यह संस्कृति लाखों-करोड़ों वर्ष पुरानी है

2. वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण (Historical Evidence)इतिहासकार और पुरातत्वविद लिखित साक्ष्यों और खुदाई में मिली चीजों (कार्बन डेटिंग) के आधार पर इसकी प्राचीनता तय करते हैं:
सिंधु घाटी सभ्यता (3300 ईसा पूर्व – 1300 ईसा पूर्व): आज से लगभग 5000 वर्ष पहले की इस सभ्यता की खुदाई में 'पशुपति शिव' की मुहरें, मातृदेवी की मूर्तियां, शिवलिंग और स्वास्तिक के चिह्न मिले हैं. इससे साबित होता है कि सनातन धर्म की जड़ें कम से कम 5000 साल पुरानी हैं.वैदिक काल (1500 ईसा पूर्व): आधुनिक इतिहासकार मानते हैं कि वेदों को लिखित रूप आज से लगभग 3500 से 4000 वर्ष पहले दिया गया. 'ऋग्वेद' को पूरी दुनिया का सबसे पुराना जीवित ग्रंथ और लिखित साहित्य माना जाता है.

मौखिक परंपरा (Oral Tradition): इतिहासकार यह भी स्वीकार करते हैं कि वेदों को लिखे जाने से कई हजार साल पहले से इन्हें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक मौखिक रूप से गाकर बिल्कुल सटीक याद रखा जाता था. इस आधार पर कई विद्वान इसकी जड़ें 10,000 वर्ष से भी अधिक पुरानी मानते हैं.निष्कर्ष: संक्षेप में, यदि लिखित इतिहास के पैमाने पर देखें तो सनातन धर्म कम से कम 5,000 वर्ष पुराना है, लेकिन इसकी दार्शनिक और मौखिक परंपराएं मानव सभ्यता के जन्म जितनी ही प्राचीन हैं।
लेखक_रवि गंगवार 
नाथ नगरी बरेली 

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