क्या इसलिए भी गोडसे गांधी से नाराज था ऐसी कई घटनाएं हिंदुओं के साथ हुईं थीं मुस्लिम लीग द्वारा घोषित 'डायरेक्ट एक्शन डे'
Ravi Patel 1946 में कलकत्ता (कोलकाता) दंगों के दौरान महात्मा गांधी का एक कथित बयान बहुत विवादों में रहा, जिसमें उन्होंने कहा था कि "कलकत्ता के सारे हिंदू मर कर अपनी कुर्बानी दे देते तो बेहतर होता।" इस ऐतिहासिक घटना और इस बयान से जुड़े कारण और संदर्भ निम्नलिखित हैं: यह बयान क्यों और कब दिया गया? 16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग द्वारा घोषित 'डायरेक्ट एक्शन डे' (Direct Action) के दौरान कलकत्ता में भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इस हिंसा में कई हजार लोग मारे गए थे और बड़े पैमाने पर हिंदुओं को निशाना बनाया गया था。 इन दंगों के दौरान 'गोपाल पाठा' (गोपाल चंद्र मुखर्ज़ी) नामक व्यक्ति ने हिंदुओं की रक्षा के लिए एक संगठन बनाया था और आत्मरक्षा में हथियार उठाए थे। महात्मा गांधी का दृष्टिकोण: महात्मा गांधी अपने अहिंसा के सिद्धांतों के प्रबल समर्थक थे。 जब स्थिति शांत हुई, तो गांधी जी ने कलकत्ता का दौरा किया。 अहिंसा के प्रति अपनी अटूट निष्ठा के कारण, उनका मानना था कि हिंदुओं को हिंसा का जवाब हिंसा या हथियारों से नहीं देना चाहिए। उनका यह बयान इसी विचारधारा (अहिंसा) पर आधारि...