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रवि पटेल ," ravivnshi.blogspot.com "

कुर्मी राजा जयलाल सिंह और बेगम हजरत महल की जोड़ी 1857 की क्रांति के महानायक,,,,महाराजा तुलसी कुर्मी

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Ravi Patel 1857 की प्रथम स्वाधीनता क्रांति में बेगम हज़रत महल और राजा जय लाल सिंह (Raja Jai Lal Singh) की जोड़ी ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अवध (लखनऊ) में विद्रोह का सबसे मजबूत मोर्चा संभाला था. राजा जय लाल सिंह, बेगम हज़रत महल की सेना के मुख्य सेनापति (Commander-in-Chief) और उनके सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार थे. इन दोनों महानायकों का ऐतिहासिक संबंध और 1857 की क्रांति में इनका योगदान इस प्रकार है: 👑 सेनापति की नियुक्ति और "नुसरत जंग" की उपाधि भरोसेमंद नेतृत्व: जब अंग्रेजों ने नवाब वाजिद अली शाह को बंदी बनाकर कलकत्ता भेज दिया, तब बेगम हज़रत महल ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने 11 वर्षीय नाबालिग पुत्र बिरजिस क़द्र की ताजपोशी कर अवध की कमान संभाली. [1, 4, 5] ताजपोशी और जिम्मेदारी: ब्रिटिशों के खिलाफ सैन्य मोर्चे को मजबूत करने के लिए बेगम ने आजमगढ़ के अवधिया-कुर्मी राजवंश से ताल्लुक रखने वाले वीर योद्धा राजा जय लाल सिंह को अपना मुख्य सेनापति नियुक्त किया. ताजपोशी की पूरी रस्म भी उन्हीं की देखरेख में संपन्न हुई थी. [2, 5, 6, 7] शाही उपाधि: राजा जय लाल की वीरता और प्रशासनिक सूझब...

क्या इसलिए भी गोडसे गांधी से नाराज था ऐसी कई घटनाएं हिंदुओं के साथ हुईं थीं मुस्लिम लीग द्वारा घोषित 'डायरेक्ट एक्शन डे'

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Ravi Patel   1946 में कलकत्ता (कोलकाता) दंगों के दौरान महात्मा गांधी का एक कथित बयान बहुत विवादों में रहा, जिसमें उन्होंने कहा था कि "कलकत्ता के सारे हिंदू मर कर अपनी कुर्बानी दे देते तो बेहतर होता।"   इस ऐतिहासिक घटना और इस बयान से जुड़े कारण और संदर्भ निम्नलिखित हैं: यह बयान क्यों और कब दिया गया? 16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग द्वारा घोषित 'डायरेक्ट एक्शन डे' (Direct Action) के दौरान कलकत्ता में भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इस हिंसा में कई हजार लोग मारे गए थे और बड़े पैमाने पर हिंदुओं को निशाना बनाया गया था。 इन दंगों के दौरान 'गोपाल पाठा' (गोपाल चंद्र मुखर्ज़ी) नामक व्यक्ति ने हिंदुओं की रक्षा के लिए एक संगठन बनाया था और आत्मरक्षा में हथियार उठाए थे।  महात्मा गांधी का दृष्टिकोण: महात्मा गांधी अपने अहिंसा के सिद्धांतों के प्रबल समर्थक थे。 जब स्थिति शांत हुई, तो गांधी जी ने कलकत्ता का दौरा किया。 अहिंसा के प्रति अपनी अटूट निष्ठा के कारण, उनका मानना था कि हिंदुओं को हिंसा का जवाब हिंसा या हथियारों से नहीं देना चाहिए।  उनका यह बयान इसी विचारधारा (अहिंसा) पर आधारि...

भीड़ द्वारा DIG की खौफनाक लिंचिंग, वोट बैंक के चक्कर में सबूत मिटा कर आरोपियों को मुलायम-अखिलेश ने बचाया, अब योगी राज में मिली उम्रकैद

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Ravi Patel यूपी में एक वक्त ऐसा भी था जब खाकी वर्दी, जो आम आदमी की सुरक्षा और कानून का सबसे बड़ा प्रतीक है, उसे भी मुस्लिम भीड़ के आगे घुटने टेकने पड़ते थे। 6 जुलाई 2011 को मुरादाबाद के मैनाठेर में जो हुआ वो कोई आम दंगा नहीं था। वो एक कट्टरपंथी भीड़ का सीधे-सीधे देश के खिलाफ एक खूनी ऐलान था। उस दिन कानून के रखवालों का शिकार किया गया, और एक सर्विंग डीआईजी (DIG) को तो पीट-पीट कर मौत के मुंह तक पहुंचा दिया गया था। हाल ही में 28 मार्च को मुरादाबाद कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इस केस से जुड़े 16 इस्लामी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। ये CM योगी आदित्यनाथ सरकार की एक बड़ी क़ानूनी जीत है। बाहर से देखने वालों को लग सकता है की एक दशक पुराने दंगे का फैसला आ गया। लेकिन जो लोग यूपी की राजनीति की काली सच्चाई समझते हैं, उनके लिए ये फैसला समाजवादी पार्टी (SP) के चेहरे से नकाब नोंच लेने जैसा है। मैनाठेर की घटना आम कानून-व्यवस्था बिगड़ने का मामला नहीं थी। इसमें सत्ता में बैठे लोगों की जो मिलीभगत थी, वो रोंगटे खड़े कर देने वाली है। सच कहूं तो,  ये कहानी सिर्फ एक हिंसक भीड़ की नहीं है। ये...