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रवि पटेल ," ravivnshi.blogspot.com "

क्या इसलिए भी गोडसे गांधी से नाराज था ऐसी कई घटनाएं हिंदुओं के साथ हुईं थीं मुस्लिम लीग द्वारा घोषित 'डायरेक्ट एक्शन डे'

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Ravi Patel   1946 में कलकत्ता (कोलकाता) दंगों के दौरान महात्मा गांधी का एक कथित बयान बहुत विवादों में रहा, जिसमें उन्होंने कहा था कि "कलकत्ता के सारे हिंदू मर कर अपनी कुर्बानी दे देते तो बेहतर होता।"   इस ऐतिहासिक घटना और इस बयान से जुड़े कारण और संदर्भ निम्नलिखित हैं: यह बयान क्यों और कब दिया गया? 16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग द्वारा घोषित 'डायरेक्ट एक्शन डे' (Direct Action) के दौरान कलकत्ता में भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इस हिंसा में कई हजार लोग मारे गए थे और बड़े पैमाने पर हिंदुओं को निशाना बनाया गया था。 इन दंगों के दौरान 'गोपाल पाठा' (गोपाल चंद्र मुखर्ज़ी) नामक व्यक्ति ने हिंदुओं की रक्षा के लिए एक संगठन बनाया था और आत्मरक्षा में हथियार उठाए थे।  महात्मा गांधी का दृष्टिकोण: महात्मा गांधी अपने अहिंसा के सिद्धांतों के प्रबल समर्थक थे。 जब स्थिति शांत हुई, तो गांधी जी ने कलकत्ता का दौरा किया。 अहिंसा के प्रति अपनी अटूट निष्ठा के कारण, उनका मानना था कि हिंदुओं को हिंसा का जवाब हिंसा या हथियारों से नहीं देना चाहिए।  उनका यह बयान इसी विचारधारा (अहिंसा) पर आधारि...

भीड़ द्वारा DIG की खौफनाक लिंचिंग, वोट बैंक के चक्कर में सबूत मिटा कर आरोपियों को मुलायम-अखिलेश ने बचाया, अब योगी राज में मिली उम्रकैद

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Ravi Patel यूपी में एक वक्त ऐसा भी था जब खाकी वर्दी, जो आम आदमी की सुरक्षा और कानून का सबसे बड़ा प्रतीक है, उसे भी मुस्लिम भीड़ के आगे घुटने टेकने पड़ते थे। 6 जुलाई 2011 को मुरादाबाद के मैनाठेर में जो हुआ वो कोई आम दंगा नहीं था। वो एक कट्टरपंथी भीड़ का सीधे-सीधे देश के खिलाफ एक खूनी ऐलान था। उस दिन कानून के रखवालों का शिकार किया गया, और एक सर्विंग डीआईजी (DIG) को तो पीट-पीट कर मौत के मुंह तक पहुंचा दिया गया था। हाल ही में 28 मार्च को मुरादाबाद कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इस केस से जुड़े 16 इस्लामी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। ये CM योगी आदित्यनाथ सरकार की एक बड़ी क़ानूनी जीत है। बाहर से देखने वालों को लग सकता है की एक दशक पुराने दंगे का फैसला आ गया। लेकिन जो लोग यूपी की राजनीति की काली सच्चाई समझते हैं, उनके लिए ये फैसला समाजवादी पार्टी (SP) के चेहरे से नकाब नोंच लेने जैसा है। मैनाठेर की घटना आम कानून-व्यवस्था बिगड़ने का मामला नहीं थी। इसमें सत्ता में बैठे लोगों की जो मिलीभगत थी, वो रोंगटे खड़े कर देने वाली है। सच कहूं तो,  ये कहानी सिर्फ एक हिंसक भीड़ की नहीं है। ये...

अहिच्छत्र भी था बरेली का पुराना नाम ब्रिटिशकाल में टीलों की खुदाई से निकला था चमत्कृत करने वाला अहिच्छत्र का इतिहास Bareilly News

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Ravi Patel अहिच्छत्र...आज का बरेली , जहां सदियों पहले उल्लास, उमंग, ऐश्वर्य और वैभव के हजारों रंग बिखरे थे। जहां धन-संपदा की चमक से यह नगर अन्य समकालीन राज्यों को अपनी ओर आकर्षित करता था। जिसके गौरवशाली अतीत का अनुमान आज भी यहां अवस्थित खंडहरों को देखकर लगाया जा सकता है। बरेली के आंवला स्टेशन से कोई 10 किमी उत्तर में प्राचीन अहिच्छत्र के अवशेष आज भी मौजूद हैं। ब्रिटिशकाल में इन टीलों की खोदाई के बाद चमत्कृत कर देने वाला इतिहास सामने आया। आइए जानते है अहिच्छत्र के उस इतिहास को जिसे रुहेलखंड की धरती अपने में संजोए हुए है।  रुहेलखंड नाम से प्रसिद्धि प्राप्त करने से पहले बरेली समेत आसपास का बड़ा परिक्षेत्र प्राचीनकाल में पांचाल राज्य हुआ करता था। महाभारतकाल में अहिच्छत्र पांचाल नामक राज्य की राजधानी रहा। द्रोपदी इसी राज्य की राजकुमारी थीं, जिन्होंने 5000 साल पहले भगवान शिव को समर्पित बनखंडी नाथ मंदिर में पूजा की थी, पांचाल जनपद का प्रामाणिक इतिहास ई.पू. छठी शताब्दी से मिलता है। तब यह 16 जनपदों में से एक था। चीनी यात्री ह्वेनसांग और उसके बाद 11वीं सदी में आए अल बरूनी ने भी अहिच्छत्र का ...