विभाजन::दलितों पर मुस्लिम लीग के अत्याचार और ‘जय भीम जय मीम’ का घातक छल
Ravi Gangwar 14 अगस्त केवल कैलेंडर की एक तिथि नहीं, वह दलित हिन्दुओं की असह्य वेदना का शोक सूत्र है। यह वही दिन है जब 1947 के राजनीतिक विभाजन के साथ धार्मिक उन्माद की लहरें उठीं और मुस्लिम लीग के नेतृत्व में संगठित हिंसा का ऐसा प्रलय उमड़ा कि अनुसूचित समाज की बस्तियां राख हो गईं, असंख्य घर उजड़ गए, अस्मिता का ताड़न हुआ और पीढ़ियों तक अंकुरित होने वाली आशा का बीज कुचल दिया गया। स्वतंत्रता की दीपशिखा के साथ ही एक अन्य अग्निशिखा भी भड़की जिसकी ज्वाला ने दलित जनजीवन को घेर लिया। यह घटना केवल सीमांकन नहीं थी, यह अस्तित्व के विरुद्ध सुनियोजित आक्रमण था जिसमें सबसे पहले और सबसे निर्ममता से प्रहार दलित हिन्दुओं पर हुआ। विभाजन की साधारण कथा में प्रायः हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच हुए संघर्ष का उल्लेख भर रह जाता है, पर उसके भीतर दबा वह रक्तरंजित अध्याय आंखें चुराकर निकल जाता है जिसमें अनुसूचित समाज मुस्लिम लीग की कट्टर राजनीतिक प्रवृत्ति का सर्वप्रथम और सरल लक्ष्य बना। उनकी आर्थिक दुर्बलता, सामाजिक असुरक्षा और राजनीतिक निर्बलता को लक्ष्य कर उन्हें चुन चुनकर सताया गया, गांव खाली कर...