हिंदू धर्म उद्गम:हिंदू राजाओं ने दूसरे देशों पर आक्रमण क्यों नहीं किए

Ravi Patel 

यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य है कि भारतीय इतिहास में हिंदू  राजाओं ने मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप के भीतर ही अपने साम्राज्यों का विस्तार किया और उपमहाद्वीप के बाहर किसी अन्य देश पर लूटपाट या जबरन कब्जे के उद्देश्य से बड़े सैन्य आक्रमण नहीं किए।
क्योंकि वह ये भी मानते थे कि ये सब हमसे ही अलग हुए हैं और कभी न कभी हमारे साथ आ जाएंगे। 
क्योंकि इतिहास के अनुसार वैदिक काल में ही सनातन धर्म को कुछ अलग अवधारणा रखने वाले लोगों ने बांटना शुरू किया था। जो आगे चलकर कई धर्म बन गए। सनातन धर्म से अलग होने बाला पहला धर्म हिंदू धर्म है जो हुबहू सनातन धर्म का ही पालन करता है। इस हिंदू शब्द को वेदों से ही लिया गया है।


कैसे हुआ हिंदू धर्म का उद्गम:

सनातन धर्म को मानने भले सभी लोग कुछ न कुछ व्यवसाय करते थे लेकिन साक्षर 99 परसेंट हुआ करते थे। इन्हीं सबसे ज्यादा पड़े लिखे लोगों के लिए उनके सबसे बड़े गुरु बृहस्पति ने हिंदू उपाधि दी। और आगे चलकर इसे हिंदू धर्म के रूप में स्वीकार कर लिया गया।
क्योंकि हिंदू का अर्थ होता है अज्ञानता को दूर करने वाला।
बृहस्पति आगम में हिंदू शब्द का उपयोग किया गया है।

इतिहासकारों के अनुसार, हिंदू राजाओं द्वारा भारत के बाहर आक्रमण या लूटपाट न करने के पीछे निम्नलिखित प्रमुख सांस्कृतिक, भौगोलिक और आर्थिक कारण थे:

आर्थिक समृद्धि (सोने की चिड़िया): प्राचीन और मध्यकालीन भारत दुनिया के सबसे अमीर क्षेत्रों में से एक था। भारत के पास कृषि, व्यापार, मसाले, रत्न और वस्त्रों का विशाल भंडार था। भारत को किसी अन्य देश को लूटने की आर्थिक आवश्यकता ही नहीं थी, बल्कि दुनिया भर के व्यापारी खुद व्यापार करने भारत आते थे।
भू-राजनीतिक और भौगोलिक स्थितियाँ: भारत की सीमाएं प्राकृतिक रूप से सुरक्षित थीं—उत्तर में विशाल हिमालय और तीन तरफ से समुद्र। प्राचीन भारतीय राजाओं का मुख्य ध्यान उपमहाद्वीप के भीतर ही चक्रवर्ती सम्राट बनने या अपने क्षेत्रों को सुरक्षित रखने पर केंद्रित रहा।
सांस्कृतिक और दार्शनिक मूल्य: भारतीय दर्शन में 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) और 'धर्म-युद्ध' (न्याय के लिए लड़ाई) के सिद्धांतों को प्राथमिकता दी गई। युद्ध के नियम तय थे, जिनमें निहत्थों, महिलाओं और नागरिकों को नुकसान न पहुँचाना शामिल था। लूटपाट को अनैतिक माना जाता था।
समुद्र पार करने पर धार्मिक प्रतिबंध: इतिहास के एक कालखंड में हिंदू समाज में 'समुद्रोल्लंघन' (समुद्र पार यात्रा करना) को वर्जित या 'कलिवर्ज्य' माना जाने लगा था, जिससे यह मान्यता बनी कि समुद्र पार करने से व्यक्ति का धर्म या जाति प्रभावित हो सकती है। इस सामाजिक नियम ने भी बड़ी नौसैनिक विजयों की इच्छा को सीमित किया।
सांस्कृतिक और शांतिपूर्ण विस्तार: जहाँ सैन्य आक्रमण नहीं हुए, वहीं चोल राजवंश (Chola Dynasty) जैसे राजाओं ने अपनी शक्तिशाली नौसेना के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया (जैसे इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया) के साथ मजबूत व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध बनाए। उन्होंने वहां युद्ध या लूटपाट करने के बजाय हिंदू धर्म, कला, वास्तुकला (जैसे अंकोरवाट मंदिर) और भाषा का शांतिपूर्ण प्रसार किया।संक्षेप में, भारत की अपनी आंतरिक संपन्नता, नैतिक मूल्य और भौगोलिक स्थिति ऐसे मुख्य कारण थे जिनकी वजह से प्राचीन भारतीय हिंदू शासकों को सीमाओं के बाहर जाकर लूटपाट करने की कभी जरूरत महसूस नहीं हुई।

लेखक_रवि गंगवार 

नाथ नगरी बरेली 

टिप्पणियाँ

Top Posts

‘द ग्रेट खली’ हुए भाजपा में शामिल, Great Khali joins BJP:

मौत का कारोबार, दूसरों की मौत से प्यार नहीं , मौत तो हमारा स्वाद है, शाकाहारी

सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर जावेद अख्तर का ट्वीट, बोले- विचार अच्छा लेकिन चयन ठीक नहीं

बिपिन रावत जी की मौत पर खुशी मनाने वालों से नाराज फिल्ममेकर अली अकबर ने छोड़ा इस्लाम

6 जनवरी 1989 : माननीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी के हत्यारों को दी गई थी फांसी, दो बॉडीगार्ड्स ने की थी हत्या : खालिस्तानियों पर की थी पीएम ने कार्रवाई

ॐयोगी कौन हैं, एक नया किस्सा, दिललचस्पॐ

भोपाल गैस त्रासदी में कैसे बचा कुशवाह परिवार गाय और हवन की शक्ति सनातन भक्ति

इतिहास की किताबों से क्यों गुमशुदा हूंई भारत की पहली वनस्पति शास्त्री जानकी अम्माल जिन्होंने गन्ने को मीठा बनाया

जंगल मे टाइगर ने एक फैक्ट्री डाली🐅 उसमे एकमात्र वर्कर एक चींटी🐜

गंग वंश,काकतीय वंश इतिहास गंगवार